100g कुलथी दाल में
दूध से तीन गुना
प्रोटीन

Health

दालों को प्रोटीन का सबसे बढ़िया
स्रोत माना जाता है। इनमें कुलथी दाल ऐसी है
जिसमें सबसे अधिक न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं।
कई ट्राइबल इलाकों में कुलथी दाल
सबसे ज्यादा खाई जाती है। 

डाइटीशियन डॉ. विजयश्री प्रसाद बताती
हैं कि इस दाल में कई बायोएक्टिव पदार्थ होते
हैं जैसे-फेनोलिक एसिड, फ्लैवोनॉड्स और
टैनिंस। ये कई बीमारियों को खत्म करते हैं।

कई शोधों में बताया गया है कि कुलथी
की दाल किडनी में बने स्टोन को गलाने में मदद
करती है। स्टोन गलकर यूरिन के रास्ते निकल
जाता है। नियमित सेवन से कांस्टिपेशन दूर
किया जा सकता है।

जिन्हें यूरिक एसिड बढ़ने की
शिकायत होती है वे कुलथी दाल का सेवन
कर सकते हैं। रेगुलर कुलथी दाल खाने से
कोलोन कैंसर का भी रिस्क कम रहता है। 

कुलथी दाल पाइल्स के रोगियों के
लिए भी अच्छी मानी जाती है। कुलथी दाल में
प्रचुर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। इसे
सलाद के रूप में कच्चा खा सकते हैं। 

आयुर्वेद के अनुसार, महिलाओं को रेगुलर
कुलथी दाल का सेवन करना चाहिए। खासकर
डिलीवरी के बाद प्रसूता को कम से कम डेढ़
महीने तक इसका सेवन लाभ पहुंचाता है। 

कुलथी दाल का पानी या सूप पीने
से महिलाओं को भरपूर आयरन की मात्रा
मिलती है। जो माएं ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं
उनमें दूध बढ़ाने में कारगर होता है। 

कुलथी दाल में आयरन की अच्‍छी मात्रा रहती है।
यह महिलाओं में पीरियड्स से जुड़ी समस्‍याओं को
भी दूर करने में मदद करती है। प्रतिदिन 1 चम्‍मच
कुलथी दाल के पाउडर का सेवन करना चाहिए।

कुलथी दाल में कैल्शियम, फॉस्‍फोरस, आयरन
और एमिनो एसिड होते हैं। ये पुरुषों में स्पर्म को
बढ़ाते हैं। आयुर्वेद में बताया गया है कि कुलथी
दाल स्पर्म को पतला होने से रोकता है। 

कुलथी की दाल में ऐसे न्यूट्रिएंट्स
होते हैं जो ब्लड ग्लूकोज लेवल को नियंत्रित
रखते हैं। डायबिटीज रोगियों को कुलथी
दाल खाने की सलाह दी जाती है। 

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