2023 में बर्नआउट से ऐसे बचें 

क्या आप भी
बर्नआउट के शिकार हैं? 

थक कर चूर हो गया। अब काम करने की
ताकत ही नहीं बची शरीर में। जब ऐसा कहते हैं
तो इसका मतलब बर्नआउट है। जबकि कई बार
लोग बर्नआउट को डिप्रेशन समझ लेते हैं। 

किसी काम में मन न लगना, हमेशा दिमाग
चिंता के बोझ तले दबे रहना और खुद को कमतर
समझना बर्नआउट सिंड्रोम के लक्षण होते हैं। 

यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया
के मुताबिक, लंबे समय तक स्ट्रेस में रहना
और लगातार दिन-रात सोचते रहने की वजह से
बर्नआउट सिंड्रोम की समस्या पैदा होती है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी काम में इस हद
तक न उलझें कि आपकी मानसिक स्थिति पर
इसका असर पड़े। ऑफिस के काम को घर लाने
से बचें। यह रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।

फ्री टाइम में किसी गेम या ऐसी
एक्टिविटी में अपना समय दें, जिसे करके
आपको खुशी होती है। हर दिन आधे घंटे ऐसी
एक्टिविटी करने से स्ट्रेस रीलीज होता है।

जब आपके पास करने को बहुत काम हो
और आपकी टु-डू लिस्ट खत्म होने का नाम न ले,
तो आप टास्क पैरालिसिस से ग्रस्त हो जाते हैं।
इस पर ध्यान देना जरूरी है। 

टास्ट पैरालिसिस से बचना है तो हर काम
को समय पर पूरा करें। किसी काम को टालें नहीं।
एक काम निपटा कर खुद को कोई छोटा सा
रिवार्ड दें, आप अच्छा महसूस करेंगे।

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