आंखों में नहीं यहां लगाया जाने की परंपरा

दिवाली की रात क्यों बनाया
जाता है काजल

दिवाली के दिन भगवान लक्ष्मी- गणेश की
पूजा करने ते साथ दिवाली की रात को दीपक
से काजल बनाकर लगाने की परंपरा है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार काजल
का टीका बुरी शक्तियों से बचाता है। इसी
कारण दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेश पूजन
करने के बाद काजल बनाया जाता है।

यह काजल आंखों में ही नहीं बल्कि तिजोरी,
चूल्हा, दरवाजों आदि में लगाया जाता है।

काजल बनाने के लिए सरसों का तेल, लंबी रूई
की बत्ती और दो बड़े दीपक ले लें। सबसे पहले एक
दीपक में बाती और सरसों का तेल डालकर जला दें।

दूसरा दीपक या प्लेट इस तरह रखें कि वो जल
रही लौ के ऊपर रहे। करीब एक घंटे बाद ऊपर
वाली प्लेट को सावधानी से उठा लें।

आप देखेंगे कि कालिख नजर आएगी। इसे
आप किसी डिब्बी में रूई की मदद से
निकाल लें। इसके साथ ही इसमें थोड़ा
सा शुद्ध घी डाल दें। काजल तैयार है।

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