चमकेगी किस्मत, पितृ दोष से पाएं मुक्ति

मार्गशीर्ष अमावस्या को
करें ये उपाय

मार्गशीर्ष अमावस्या 23 नवंबर से शुरू
हो रही है। अमावस्या के स्वामी पितर देवता
माने गए हैं, इसलिए इस तिथि पर पितरों के
लिए धूप-ध्यान करने की परंपरा है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या के
दिन दान-पुण्य करने से कई गुना फल मिलता है।
पवित्र जल में स्नान करने की परंपरा है।

अमावस्या की सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव
को जल चढ़ाएं और ‘ऊँ सूर्याय नम:’ मंत्र का
जाप करें। शिव मंदिर जाएं और तांबे के लोटे में
जल भर कर शिवलिंग का अभिषेक करें। 

मार्गशीर्ष अमावस्या की सुबह पितृ कवच
या रुद्र सूक्त का पाठ नियमित रूप से करें।
अगर सुबह नहीं कर पा रहे हैं तो शाम की
पूजा के दौरान पितृ कवच का पाठ करें।

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