हर रंग में छिपी एक दवा

कलर थेरेपी

कलर थेरेपी में कई तरह के रंगों से बीमारियों
का इलाज होता है। इसे ‘क्रोमोथेरेपी’ भी कहते हैं।

हर रंग की अपनी अलग वेव लेंथ और
फ्रीक्वेंसी है जो अलग-अलग लोगों में
अलग तरीके से हीलिंग करती है।

कलर थेरेपी का इस्तेमाल करीब 4000
साल पुराना है। इजिप्ट, ग्रीस, चीन और इंडिया
में इसे अपनाया गया। आयुर्वेद के आचार्य
चरक भी कलर थेरेपी करते थे।

इलाज से पहले व्यक्ति का ऑरा
चेक किया जाता है। खुशी में ऑरा ब्राइट
कलर्स का बनेगा और दुख में कुछ धब्बों
के साथ डार्क कलर्स का।

इसे ऑरा रीडर मेडिटेशन, मेटल टूल्स
या ऑरा कैमरा से चेक करते हैं।

स्ट्रेस, डिप्रेशन, गुस्सा, ब्लड प्रेशर,
एंग्जायटी और स्किन डिजीज इस थेरेपी
से ठीक की जा सकती है।

इस थेरेपी में खास रंग के कपड़ों और
स्टोन को पहनने या खाने-पीने की चीजों
के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है।

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