मारबर्ग वायरस से
9 मौतें, WHO ने
जारी किया अलर्ट

Health

मारबर्ग वायरस का इंसानों में पाया जाना
दुर्लभ है। यह ज्यादातर चमगादड़ों में मिलता है।
यह इबोला वायरस के परिवार से आता है।

CDC के मुताबिक, संक्रमित मरीज की
त्वचा पर बिना खुजली वाला रैश भी हो सकता है।
यह आमतौर पर बीमारी के 5वें दिन आता है।
यह पेट, पीठ और सीने में उभरता है।

WHO के अनुसार, मारबर्ग वायरस
के संक्रमण के तीसरे और चौथे दिन
मरीज का चेहरा डेड दिखता है।

मौत से पहले ब्लीडिंग और झटके
आते हैं। वायरस इतना संक्रामक है कि
मरने के बाद भी शरीर में रहता है।

मारबर्ग वायरस से बचने के केवल दो
ही रास्ते हैं- कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करना और
संदिग्ध लोगों को आइसोलेट करना।

इस वायरस के लिए कोई वैक्सीन
या एंटी वायरल मेडिसिन नहीं है। मरीज
की जरूरी देखभाल और शरीर को हाइड्रेटेड
रखकर इससे बचा जा सकता है।

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