विज्ञापनों और फैशन ने 100 साल में
बदला महिलाओं का मन

ऐसे शुरू हुआ
बॉडी हेयर रिमूव कराने का ट्रेंड

साल 1900 की शुरुआत में अमेरिका
समेत अधिकतर देशों में महिलाओं में बॉडी
हेयर रिमूव कराने का चलन नहीं था।

1901 में जिलेट कंपनी बनी। 1904 में
पुरुषों के लिए और 1915 में महिलाओं के
लिए कंपनी ने सेफ्टी रेजर मार्केट में उतारा।

1920 में शॉर्ट स्कर्ट का ट्रेंड शुरू हुआ तो
हेयर रिमूवल इंडस्ट्री ने पैरों पर भी फोकस
करते हुए विज्ञापन देने शुरू कर दिए।

1946 में अमेरिका में बिकिनी फैशन में आई
और इसका चलन बढ़ने के साथ ही लड़कियों पर
बॉडी हेयर रिमूव करने का दबाव भी बढ़ता गया।

1960 के दशक में मिनी स्कर्ट का ट्रेंड
आया तो महिलाओं से उम्मीद और बढ़ गई
कि उनके हाथ-पैर में कहीं भी बाल न हों।

1980 के दशक में पुरुषों में बॉडी
बिल्डिंग का क्रेज बढ़ा तो वे भी हेयर
रिमूविंग पर ध्यान देने लगे।

2010 में ब्राजीलियन वैक्सिंग का
ट्रेंड इस कदर बढ़ा कि हर छोटे-बड़े सलून
में भी इसकी सर्विस मिलने लगी।

2020 में लॉकडाउन के दौरान सैलून बंद हुए,
तो लड़कियों ने हेयर रिमूविंग के लिए शेविंग
का तरीका अपनाना शुरू कर दिया।

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